श्री गुरु जम्भेश्वर शब्दवाणी (शब्द 06) || Shri Guru Jambheshwar Shabdvani (Shabd 06) || Bishnoism

श्री गुरु जम्भेश्वर शब्दवाणी (शब्द 06) || Shri Guru Jambheshwar Shabdvani (Shabd 06) || Bishnoism  श्री गुरु जम्भेश्वर शब्दवाणी शब्द: ०६ ओउम भवन भवन म्हें एका जोती, चुन चुन लिया रतना मोती। भावार्थ- सम्पूर्ण चराचर सृष्टि के कण-कण में परम तत्व रूप परब्रह्या की सामान्य ज्योति सर्वत्र...

श्री गुरु जम्भेश्वर शबदवाणी (शब्द 05) || Shri Guru Jambheshwar Shabdvani (Shabd 05) || Bishnoism

शब्द: ५ श्री गुरु जम्भेश्वर शबदवाणी (शब्द 05) || Shri Guru Jambheshwar Shabdvani (Shabd 05) || Bishnoism   ओउम अइयालो अपरंपर बाणी,महे जपां न जाया जीयूं।| हे संसार के लोगों ! मेरी बाणी अपरंपार है अर्थात् तुम लोग जिनकी परंपरा से उपासना करते आये हो और अब भी कर रहे हो, ऐसी परंपरा वाली...

श्री गुरु जम्भेश्वर शबदवाणी (शब्द 04) || Shri Guru Jambheshwar Shabdvani (Shabd 04) || Bishnoism

श्री गुरु जम्भेश्वर शबदवाणी (शब्द 04) || Shri Guru Jambheshwar Shabdvani (Shabd 04) || Bishnoism  श्री गुरु जम्भेश्वर शब्दवाणी शब्द - ४ ओ3म् जद पवन न होता पाणी न होता, न होता धर गैणारूं। महाप्रलयावस्था में जब सृष्टि के कारण रूप आकाशादि तत्व ही नहीं रहते, वे अपने कारण में विलीन हो जाते...

श्री गुरु जम्भेश्वर शब्दवाणी ( शब्द ३) || Shri guru jambheshwar shabdvani (Shabd 3) || Bishnoism

श्री गुरु जम्भेश्वर शब्दवाणी ( शब्द ३) || Shri guru jambheshwar shabdvani (Shabd 3) || Bishnoism  ओ3म् मोरें अंग न अलसी तेल न मलियों, ना परमल पिसायों।  हे वीदा! मेरे इस शरीर पर किसी भी प्रकार का अलसी आदि का सुगन्धित तेल या अन्य पदार्थ का लेपन नहीं किया गया है क्योंकि मैं यहां सम्भराथल पर बैठा हुआ हूं। यहां ये सुगन्धित द्रव्य उपलब्ध भी नहीं है और न ही इनकी मुझे आवश्यकता ही है। जीमत...

श्री गुरु जम्भेश्वर शबदवाणी (शब्द 02) || Shri Guru Jambheshwar Shabadvani (Shabad 02) || Bishnoism

श्री गुरु जम्भेश्वर शबदवाणी (शब्द 02) || Shri Guru Jambheshwar Shabadvani (Shabad 02) || Bishnoism  ओउम मोरे छायान माया लोह न मांसु । रक्तुं न धातुं । मोरे माई न बापुं । रोही न रांपु । को न कलापुं । दुख; न सरापुं । लोंई अलोई । तयुंह त्रुलाइ । ऐसा न कोई । जपां भी सोई। जिहीं जपे आवागवण न होई । मोरी आद न जाणत । महियल धुं वा बखाणत । उरखडा- कले तॄसुलुं । आद अनाद तो हम रचीलो, हमे सिरजीलो...

श्री गुरु जम्भेश्वर शबदवाणी (शब्द 01) || Shri Guru Jambheshwar Shabadvani (Shabad 01) || Bishnoism

श्री गुरु जम्भेश्वर शबदवाणी (शब्द 01) || Shri Guru Jambheshwar Shabadvani (Shabad 01) || Bishnoism  सात वर्ष की आयु में खेमनराय पुरोहित के प्रति यह प्रथम शब्दोच्चारण गुरू जम्भेश्वर जी ने किया सबद 1- ओ3म् गुरु चीन्हों गुरु चीन्ह पुरोहित, गुरु मुख धर्म बखाणी। भावार्थ- ओउम् यह परम पिता परमात्मा सर्वेश्वर अनादि निराकार भगवान विष्णु का ही परम प्रिय नाम है। नाम से ही नामी का ज्ञान...

शब्दवाणी विषयक विशेष बातें

शब्दवाणी विषयक विशेष बातें  शब्दवाणी विषयक विशेष बातें श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान के शब्द वैदिक मंत्रो के समान पुण्यकारक तथा प्रमाणभूत हैं अत: प्रत्येक बिश्नोई को श्री जम्भेश्वर भगवान के शब्दों का पाठ करना चाहिये। यदि हम २९ धर्मो (नियमों) को बिश्नोई धर्म का शारीर मानते हैं तो हमें...